Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
यादृशोऽध्वा गताध्वानां निरास्थापरिदेवनः ।
संयोगो विप्रयोगश्च तादृशो देहदेहिनोः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसमें भी पहले पंचम भूमिका का ही शास्त्रीय व्यवहारो के निर्वाह के लिए अभ्यास करना चाहिए,
इस आशय से कहते हैँ ।
हे शत्रुसंतापक श्रीरामजी, निर्विकार सुषुप्ति अवस्था को (पंचमभूमिकात्मिका को) प्राप्त कर
आप उसी से शास्त्रीय आदि व्यवहारो मे निरत होइये, यों व्यवहार करने से चित्र मे विद्यमान चन्द्रमा का
जैसे कलाक्षय या राहू के साथ सम्बन्ध नहीं होता, वैसे ही आपका क्षय (मरण) या तज्जनित उद्वेग
(भय) नहीं होगा