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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 51

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 51

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

उन भावों में अचंचल (स्थिर) पत्थर आदि पदार्थ तो अपने स्वरूप में अवस्थित हैं और सुरा के फेन की नाई अत्यन्त उत्कट स्पन्द से युक्त पुरुष चंचल हैं यानी अपने स्वरूप मेँ अवस्थित नहीं हैं