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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 52

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

उसमें उन-उन शरीरो में सर्वशक्ति तत्‌-तत्‌ पदार्थ-स्वरूपापन्न आत्मा के द्वारा कल्पित अज्ञान की कलना प्रसिद्ध है, इसलिए स्वयं आत्मा ही उक्त स्वकल्पित अज्ञानस्वरूप होकर सुषुप्ति ओर प्रलय मेँ अवस्थित रहता है