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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 55

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 55

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जीव मन आदि की प्रकृति (कारण) होने से प्रकृति, उपचित (बृद्धिगत) होने से देह, अज्ञान अंश की प्रधानता से जड़ और चैतन्य की प्रधानता से चेतन कहा जाता है