Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 57
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हिन्दी अर्थ
परमात्मा का ही उपाधि में प्रवेश हो जाने से उसके अनेक नाम हो जाते हैं, इसमें श्रुतियों का प्रमाण
रूप से प्रदर्शन करते हैं।
हे अनघ, उस प्रकार के जीव के स्वरूपों का बृहदारण्यक आदि अनेक वेदान्त ग्रन्थों में अनेक तरह
से ({-)) निश्चितरूप से कथन किया गया है