Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 59
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हिन्दी अर्थ
इस युक्ति-प्रयुक्तियों से यह सिद्ध हुआ कि न तो शुद्ध आत्मा संसारी है और न देह ही संसारी है,
किन्तु मध्यवर्ती जीव ही संसारी है, इस आशय से कहते हैं।
हे महाबाहो, इस प्रकार यह जीव ही संसार का कारण है, विचार वाणी आदि से शून्य यानी जड़ देह
ने इसमें किया ही क्या ? अर्थात् जड़ शरीर से संसार स्थिति नहीं हो सकती, यह भाव है