Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 69
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 69
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हिन्दी अर्थ
जैसे आसक्त उपमाता बालकों को इधर-उधर ले जाती है, वैसे ही अपनी ही
वंचक वासना, जिसका कि जीवों का यथार्थ स्वरूप आवृत कर जीना ही स्वभाव हे, बहुत काल तक
इधर-उधर जीवों को ले जाती है