Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 70
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 70
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हिन्दी अर्थ
अपने अपने कार्यो की सिद्धियों में एक दूसरे का परस्पर
उपयोग करने के कारण जो एक दूसरे के जीवन के उपाय यानी साधन हैं, ऐसे वासनारूपी रज्जु से बँघे
हुए जीव पहले से ही जीर्ण तो हैं ही, फिर भी पर्वतों की कुक्षियों मे यानी पर्वततुल्य जड़ शरीर में अत्यन्त
दुःखपूर्वक प्राणों को क्षीण कर रहे हैं