Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 71
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, जीर्णो से भी अधिक जीर्ण होकर जिन्होंने
दरिद्रता, रोग, वियोग आदि से जनित दुःखों के बोझों को ढोया है तथा अनेक योनियों में दुर्दशाग्रस्त
परिणामों से जर्जर यानी दुःखों से शिथिल हुआ जिनका जीवन है, ऐसे जीव हृदय में उत्पन्न वासनाओं
की परम्परा से नरकं में दीर्घकाल तक निवास करते हैं, आश्चर्य है किं वासनादोष से जनित दुर्दशा
असीम है, यह भाव हे