Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
काष्ठेतरत्काष्ठभारे किंचिदन्यन्न दृश्यते ।
भूतपिण्डेतरद्देहे किंचिदन्यन्न दृश्यते ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वात्मबोध में सन्देह का निराकरण करते है ।
भद्र, आप जगत् के अधिष्ठानभूत सत्यतत्त्व को जान गये हैं, सुषुप्ति आदि तीन अवस्थाओं के
अधिष्ठान को भी जान गये है और अखण्ड वाक्यार्थ के स्वरूप को भी प्राप्त हो चुके हैं, इसलिए आप
तुर्यातीतरूपी महान् उदय के लिए शोकशून्य हो जाईये