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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

भूतपञ्चकविक्षोभनाशोत्पादेषु हे जनाः । हर्षामर्षविषादानां किं भवन्तो वशं गताः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी, अभीष्ट और अनभीष्ट विषयों को छोड़कर आप शीतल साक्षात्कार रूपी आलोक की शोभा से ऐसे सुशोभित हो रहे हैं, जैसे कि अन्धकार और मेघमण्डल से विनिर्मुक्त शरत्पूर्णिमा की रात्रि का आकाशमण्डल सुशोभित हो रहा हो