Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
अथ चैतत्त्रयमपि त्यक्त्वा सकलसिद्धये ।
यच्छेषं तदुपालम्ब्य तिष्ठावष्टब्धतत्परः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
सुकुमार और सुन्दर अवयव- सन्निवेश ही स्त्री के शरीर में अतिशय है, तो इस पर कहते हैं।
सुकुमार और सुन्दर अवयवों के संनिवेश अंश को लेकर विलक्षणता का जो उपपादन करते हैं, वह
तो केवल अज्ञानियों के लिए ही सन्तोष का विषय हो सकता है, पर जो तत्त्वज्ञ हैं, उनको तो उसमें
उपस्थित पाँचभूतों का ही दर्शन होता है