Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
स्वानुभूत्यैव पश्याशु स एवासि सदोदितः ।
आशयं हृदयग्रन्थिं त्यज तत्त्वविदांवर ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, मिट्टी
से बनाई गई प्रतिमाओं का समागम होने पर भी जिस प्रकार उनका परस्पर ममता आदि से शून्य भाव
होता है, उसी प्रकार बुद्धि, इन्द्रिय, आत्मा और मन का समागम होने पर भी आपका ममता आदि से
शून्य ही भाव हो