Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
नात्मास्त्यनुमया राम न चाप्तवचनादिना ।
सर्वदा सर्वथा सर्वं स प्रत्यक्षोऽनुभूतितः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पत्थर की बनाई गई प्रतिमाएँ अन्योन्य स्नेह-सम्बन्ध के भाजन नहीं है,
वैसे ही देह, इन्द्रिय, आत्मा और प्राण भी अन्योन्य स्नेह सम्बन्ध के भाजन नहीं है अतः उनमें से
किसके विषय में यहाँ शोक करना चाहिए ?