Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
आत्माप्रबोधाभ्युदिता निरात्मन्यात्मतां गता ।
सर्परज्जुभ्रमाकारा भ्रान्तिर्दुःखाय केवलम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जो अहम्, भूत आदि तथा तीनों कालों मे उत्पन्न होनेवाली वस्तुएँ दृश्य और दर्शन के सम्बन्धो से
दिखाई पडती हैं, वह सब केवल मन का ही विस्तार है, मन की कल्पना के सिवा ओर कुछ नहीं
है