Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
न जायते न म्रियते नादत्ते नाभिवाञ्छति ।
न मुक्तो न च बद्धोऽयमात्मा सर्वस्य सर्वदा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्वज्ञ को क्यो अनुराग नहीं होता ? इस शंका पर कहते हैं।
चूँकि तत्त्वज्ञ पुरुष इस जगत् में मन, मनन (संकल्प) जो सब कुछ विद्यमान है, वह सब
विषयोन्मुखता को प्राप्त चित्ततत्व के विलास का एक उल्लास हे, यो जानते हैं, इसलिए उनको किसी से
राग या द्वेष नहीं होता