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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

यद्यात्मनि स्थिते देवे तत्सत्ता लब्धसंस्थितिः । देहो नाशमुपायाति तत्किं नष्टमिहात्मनि ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे समुद्र को गत, आगत, स्वच्छ, चपल, मलिन एवं जड़ तरंगों से राग और द्वेष नहीं होता, वैसे ही तत्त्वज्ञानी को गत, अभ्यागत, स्वच्छ, मलिन, जड़ एवं चंचल भोगों से राग और द्वेष नहीं होता