Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 43
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हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ में युक्ति कहते हैं।
मन के साथ जो चक्षु आदि छः इन्द्रियाँ है, उनका विषय जो यह दृश्यत्व को प्राप्त यानी जगत् है,
उसका अतिक्रमण करनेवाला जो पद होगा, वह इस जगत् में विद्यमान किसी दृश्य पदार्थ का स्वरूप
नहीं हो सकता, किन्तु स्वस्वरूप हो सकता है