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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 44

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 44

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, जिस प्रकार का यह जगत्‌ है, उस प्रकार के इस जगत्‌ को भलीभाँति जाननेवाले पुरुष के लिए यह समस्त विश्व आत्मस्वरूप ही है, कहीं भी आत्मस्वरूप से वर्जित वस्तु नहीं है