Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
इति निश्चयवानन्तर्भूतमात्मतया जगत् ।
पश्य हर्षविषादाभ्यां नावशः परिभूयसे ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मार्ग पथिको के संयोग ओर वियोग की अवस्था में आस्था (अहन्ता ओर ममता के
अभिमान) एवं परिवेदन से यानी उसके वियोग से जनित (विलाप से) वर्जित हे, वैसे ही देह ओर देही
का संयोग ओर वियोग अहन्ता-ममता अभिमान एवं वियोग-जनित विलाप से वर्जित हैं