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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

तन्मयेऽस्मिन्किल जगत्यखिले संस्थितेऽनघ । किमात्मीयं परं किं स्यात्कमलेक्षण कथ्यताम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

वैसे क्यो है ? इस पर कहते हैं। जैसे कल्पित वेताल के कराल वदन, दाँत आदि विकारों से जनित प्राथमिक भय के पुनः पुनः स्मरण से बालक को मोहनेवाली भीतिर्यो मिथ्या ही हे, वैसे ही ये कल्पित स्नेह, सुख आदि मिथ्या ही हें