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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 74, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

इति कल्लोलहतया दृशा नित्यमनित्यया । ज्ञत्वकर्तृत्वभोक्तृत्वक्रिया समुपलभ्यते ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

सबको आत्मा प्रत्यक्ष है, इसका उपपादन करते हैं। बाह्य ओर आन्तर विषयों में अन्तःकरणकी वृत्ति के सम्बन्ध से अभिव्यक्त होनेवाला जो अर्थप्रकाशरूप साक्षात्‌ अपरोक्ष ज्ञान प्रसिद्ध है और जो अनुमिति, उपमिति ओर शाब्द ज्ञान आदि भी प्रसिद्ध हैं, वह सब, विषय ओर अन्तःकरण वृत्तिरूप उपाधि के परित्याग से अपरोक्ष आत्मरूपसे ही अवशिष्ट रहते हे । श्रुति भी कहती हे । प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते“