Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 74, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
विज्ञाता सत्यरूपांग नाशं याति पलायते ।
विप्रमध्यात्परिज्ञाता यथा चाण्डालकन्यका ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा ओर अनात्मा, यह नामरूप जो विभाग है, उसकी भी उसी आत्मा ने अपनी ज्ञानशक्ति से
यानी मायाशक्ति से कल्पना कर रक्खी है, अतः बाध्यत्व की उपपत्ति है, इस आशय से कहते हैं।
यह आत्मा है ओर यह आत्मा नहीं है, यों जो संज्ञाभेद है, इसकी स्वयं आत्मा ने ही अपने में अपनी
सर्वगत शक्ति से (मायाशक्ति से) कल्पना कर रक्खी हे