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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 74, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

देहस्यास्य जडस्यार्थे किं भोगैरितिनिश्चयः । भिनत्त्याशामलं ज्ञाता पञ्जरं केसरी यथा ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सब पदार्थो का अस्तित्व सर्वत्र विद्यमान है, वैसे ही महेश्वर चित्स्वरूप परमात्मा भी सर्वत्र विद्यमान हे तथा व्यापक हे, वह कहीं एक जगह पर ही यानी किसी एक देह में ही रहता है, ऐसी बात नहीं हे