Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 74, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
आशापरिकरे राम नूनं परिहृते हृदा ।
पुमानागतसौन्दर्यो ह्लादमायाति चन्द्रवत् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
परिच्छिन्न अहंस्वरूप से परमात्मा के स्फुरण में तो पुर्यष्टक हेतु है, ऐसा कहते है ।
जैसे वायु होने पर रजःकण प्रस्फुरित होते हैं अथवा जैसे दीपक होने पर दर्शन प्रस्फुरित होता है,
वैसे ही पुर्यष्टक के होने पर ही उसमें जीव प्रस्फुरित होता है, न कि पत्थर में प्रस्फुरित होता हे