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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 74, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

सर्वात्मकं सर्वगतं सर्वेशं सर्वनायकम् । सर्वाकारं निराकारं स्वमात्मानं प्रपश्यति ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

यह आत्मा दिशा या काल से परिच्छिन्न नहीं है , अतः कभी यह बद्ध नहीं होता, जब बन्ध ही नहीं है, तब मोक्ष कहाँ से होगा, इससे वास्तव में आत्मा का अमोक्ष ही स्थित है