Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 74, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
हसत्यलमतीतास्ताः पेलवा दिवसावलीः ।
यासु स्मरशरश्रेणीचपलं चित्तमास्थितम् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, मैंने पहले जो आत्मा के गुण बतलाये हैं, उन गुणों से युक्त ही
यह आत्मा सबका हे, इसलिए यह सब लोग अविचार से जनित मोह को प्राप्त होकर चारों ओर रो रहे
हैं