Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 74, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
सङ्गरङ्गविनिष्क्रान्तः शान्तमानमनोज्वरः ।
अध्यात्मरतिरासीनः पूर्णः पावनमानसः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सुमते, मेरे वचनो से आपने जगत् की पूर्वापर रचना का निःशेषरूप से भली-भाँति परिज्ञान
कर लिया हे, अतः मूर्खता को प्राप्त हुए मनुष्यों की नाई आप शोक मत कीजिये