Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
लोकाजवं जवीभावप्रोद्वेगज्ञोऽप्यखिन्नधीः ।
ब्रह्मा सममना राम क्षिपयत्यायुराततम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा
और शरीर का अत्यन्त वैधर्म्य होने पर भी देह में ज्ञातृत्व ओर आत्मा में कर्तृत्व, भोक्तृत्व आदि विरुद्ध
धर्म अविद्या के कल्लोलरूपी रागादि से उपहित तथा देह आदि के साथ तादात्म्य और संसगध्यास से
जनित होने के कारण अनित्य मिथ्या भ्रान्ति से ही सदा प्रतीत होते हैं