Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
इति पश्यन्महाबाहो भावाभावभवक्रमम् ।
हर्षामर्षविषादेहाः संत्यज्य समतां व्रज ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, जिस
प्रकार सम्पूर्ण जगत् को सुशीतल करनेवाला नैराश्य अन्तरात्मा को सुख पहुँचाता है, उस प्रकार कण्ठ
में संलग्न चन्द्रमा भी अन्तरात्मा को सुख नहीं पहुँचाता