Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
प्रविवेकाविवेकाभ्यां सुलभालभ्यतां गता ।
मुक्तिर्मनःक्षयप्राप्त्या विवेकं तेन दीपय ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
साधो, जिस मोक्षनामक परम सुख के लिए तीनों लोकों की सम्पत्तिर्यो तिनके की नाई कुछ भी उपकार
नहीं कर सकती, वह मोक्षात्मक निरतिशय सुख नैराश्य से ही प्राप्त होता है