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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

आत्मावलोकने यत्नः कर्तव्यो भूतिमिच्छता । सर्वदुःखशिरश्छेद आत्मालोकेन जायते ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे रघुकुलकमलदिवाकर, आपत्तिरूपी करंज (करंजुवे) वृक्ष के लिए परशुरूप, परम निरतिशय विश्रान्ति सुख के स्थानस्वरूप, शान्तिरूपी वृक्ष के फूलों के गुच्छ स्वरूप नैराश्य का आप आश्रय लीजिये