Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
स्नेहसंक्षयमेवाङ्ग विदुः कैवल्यमुत्तमम् ।
तत्संभवति देहस्य भावे चाभाव एव च ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र,
समस्त संकटों के पारभूत, संकट और मल से वर्जित, सुखात्मक तथा बुद्धि की परम सार्थकतास्वरूप
नैराश्य का आप अवलम्बन कीजिये