Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 57
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, जैसे वीर केसरी के पास
से हिरनी पलायन कर भाग जाती है, वैसे ही समस्त विकल्पों के परित्यागरूपी महावैराग्यसे वीरता को
प्राप्त हुए अन्तःकरण से युक्त पुरुष के पास से यह मोहकारी संसरणशील माया पलायन कर भाग
जाती है