Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 58
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 58
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हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार काम आदि दोष भी भाग जाते हैं, इस आशय से कहते हैं।
जिसकी बुद्धि धीर है, ऐसा तत्त्ववित् महात्मा वनलता की नाई अतिचपल उन्मत्त कामातुर कान्ता
को जर्जर प्रस्तर की मूर्ति के तुल्य देखता है