Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 60
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हिन्दी अर्थ
भद्र जिसके विषय में बाल अंगनाएँ अनुरक्त हैं, ऐसे भी तत्त्वज्ञ मुनि के
अन्तःकरण में उदार बुद्धि के कारण कामदेव के बाण छोटे-छोटे टुकड़े होकर धूलिरूपता को प्राप्त हो
जाते हैं