Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 61
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हिन्दी अर्थ
आत्मा के तत्त्व को पहचान लेनेवाले अपराधीन (इन्द्रियों के अवशीभूत) विद्वान् को राग
और द्वेष अपनी ओर आकृष्ट नहीं करते । श्रीरामजी, इस प्रकार महाविद्वान् में उनके द्वारा जब तनिक-
सा स्पन्दन भी नहीं हो सकता, तब उनके द्वारा आक्रमण की तो कथा कैसे हो सकती है ?