Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 69
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 69
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
जैसे वसन्त आदि ऋतुओं के
आने पर पर्वत किसी प्रकार का क्षोभ प्राप्त नहीं करता, वैसे ही कालानुसार, देशानुसार एवं क्रमानुसार
आपत्तियों के तथा सुख-दु:खों के आने पर भी तत्त्ववित् क्षोभ को प्राप्त नहीं होता ॥ ६ ८॥ हे श्रीरामजी,
वाक् आदि कर्मेन्द्रियों के व्यापारों के विषयों में डूब रहे भी आत्मज्ञ विद्वान् का कुछ भी विनष्ट नहीं
होता, वह सदा-सर्वदा अनासक्त मन से युक्त है