Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 81
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 81 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 81
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, जैसे चित्र में चित्रित कामिनी के
केश, ओष्ठ आदि अवयव मषी, कुंकुम आदि रंगस्वरूप पाँच भूतों को छोड़कर और कुछ भी नहीं हैं,
वैसे ही रूप और लावण्य से युक्त जीवित कामिनी के भी केश, ओष्ठ आदि पांच भूतोंके स्वरूप से
अतिरिक्त दूसरा कुछ भी नहीं है, इसलिए कान्ता-प्रतिमा और जीवित कान्ता में तत्वतः समानता
होने के कारण जीवित-कान्ता की क्या उपादेयता हो सकती है ?