Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 80
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 80 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 80
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, तत्त्ववेत्ता पुरुष रूपलावण्ययुक्त कामिनी को भी चित्र
में लिखित कान्ता की प्रतिमा की नाई ही देखते हैं, क्योंकि वह द्रव्यमात्र समारम्भ है यानी उसका
तात्त्विक स्वरूप पंचभूतात्मक द्रव्यमात्र ही है