Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
एवं विलोललहरीभीमात्संसारसागरात् ।
उत्तीर्यते चेन्मग्नेन तत्परं पौरुषं भवेत् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पैरों से आक्रमण करने पर आकाश सम्बन्ध को प्राप्त नहीं होता, वैसे ही समस्त देवताओं के द्वारा
पीयमान सोम, जिसके भीतर ब्रह्यात्मक रसायन यानी (पुनरुज्जीवन का अमृत) विद्यमान है, सुख,
दुःख आदि के संसर्ग को प्राप्त नहीं होता