Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
ललाटमणिपट्टाढ्या विलासग्राहसंकुलाः ।
कटाक्षलोलगहना वर्णकाञ्चनवालुकाः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त देवताओं का मुखस्वरूप अग्नि क्रिया समूह में तत्पर होता हुआ भी
यज्ञीय लक्ष्मी का चिरकाल तक उपभोग करता हुआ परन्तु मुक्त होकर ही इस त्रिभुवन में रहता हे