Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
केशेन्द्रनीलवलया भ्रूविलासतरङ्गिताः ।
नितम्बपुलिनस्फीताः कण्ठकम्बुविभूषिताः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
दानवाँ की कार्य सिद्धि के लिए भगवान् नारायण के साथ युद्ध कर रहे कुशल
शम्बरासुर ने अथवा कुशल नाम के एक अन्य दानव ने परम तत्त्वज्ञान को प्राप्त कर इस संसार का
परित्याग कर दिया