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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

छदश्रीपद्मरागाढ्या नेत्रनीलोत्पलाकुलाः । दन्तपुष्पफलाकीर्णाः स्मितफेनोपशोभिताः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, यद्यपि केवल माया में ही निरत रहता था तथापि हृदयस्थ चिदाकाश एकरूपता से आविर्भूत शम्बरासुर ने इस संसाररूपी माया का परित्याग कर दिया