Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
पश्यास्मिन्प्रसृता राम वीचयश्चारुचञ्चलाः ।
इमा मुग्धाङ्गनानाम्न्यः शिखराकर्षणक्षमाः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
पाताल तल का परिपालन करनेवाले दानवोचित कर्मो का अनुष्ठान कर रहे भक्त प्रवर प्रह्लाद अविनाशी,
वाणी के अगोचर परम सुख को (मोक्ष को) प्राप्त हुए