Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
आलीनजीवितसरिद्भोगरत्नसमुद्गकः ।
क्षुब्धरोगोरगाकीर्ण इन्द्रियग्राहघर्घरः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इन्द्र के युद्ध में अपने शरीर का परित्याग करनेवाले मानी वृत्रासुर ने,
जिसका अन्तःकरण अत्यन्त उदार था, भीतर प्रशान्त मन होकर ही देवताओं के साथ युद्ध किया