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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

प्रभ्रमत्पुण्यडिण्डीरो ज्वलन्नरकवाडवः । तृष्णाविलोललहरिर्मनोजलमतङ्गजः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

“दिवस स्थितिम्‌" ऐसा यदि पाठ हो, तो पाताल में निवास करने के लिए भगवान्‌ के द्वारा नियमित दिवसों का परिपालन करते हुए महाराज बलि जीवन्मुक्त होकर अवस्थित है" ऐसा अर्थ करना चाहिए । दानवो का अधिपति नमुचि सदा-सर्वदा देवताओं के साथ युद्ध या मर्यादा व्यतिक्रम में तथा अनेकविध देव ओर दानवो के आचरण एवं विचार-विमर्शो में तत्पर होता हुआ भी भीतर से सन्तप्त (खिन्न) नहीं होता था