Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
यस्यायं सागरः पूर्णो मोहाम्बुभरपूरितः ।
अगाधमरणावर्तकल्लोलाकुलकोटरः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
पाताल की
पीठ पर आसीन होकर बलिराज यथार्थ-से व्यापार को करते हुए भी सदा त्यागी, सदा अनासक्त ओर
जीवन्मुक्तरूप से स्थित हैं