Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अयं हि परदुष्पारो घोरः संसारसागरः ।
विना युक्तिप्रयत्नाभ्यामस्माद्राम न तीर्यते ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
विचित्र सैन्य तथा बाहुबल का जिनमें उपयोग होता था, एसे युद्धं मे तथा अनेक
व्यवहारो मे दीर्घकाल तक स्थित रहे महाराज मान्धाता आखिर परम पद को प्राप्त हुए