Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विचार्यार्यैः सहालोक्य धिया संसारसागरम् ।
एतस्मिंस्तदनु क्रीडा शोभते राम नान्यथा ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
ऊपर के लोकों का और प्राणिसमूहों के अंगों का चिरकाल से संचरण
करा रहा वायु भी मुक्त ही स्थित है, जो सदा सर्वदा सर्वत्र संचरण करता हे